Sunday, January 21, 2018

‘नवदुनिया प्रजामंडल’ की बैठक में डॉ शरद सिंह

Navdunia, Sagar Edition,  20.01.2018
19.01.2018 को ‘नवदुनिया प्रजामंडल’ के मेरे सहित उपस्थित सभी सदस्यों ने एक बैठक कर के  कुछ महत्वपूर्ण योजनाएं तय कीं, उन्हें आज 20.01.2018 को दैनिक ‘नवदुनिया’ ने प्रमुखता से स्थान दिया जिसके लिए दैनिक ‘नवदुनिया’ को हार्दिक धन्यवाद !
Navdunia, Sagar Edition,  20.01.2018

Navdunia, Sagar Edition, 20.01.2018

Friday, January 19, 2018

धारा 370 की ऐतिहासिक भूल अब सुधरनी ही चाहिए - डॉ. शरद सिंह ... मेरा कॉलम : चर्चा प्लस

Dr (Miss) Sharad Singh
चर्चा प्लस
धारा 370 की ऐतिहासिक भूल अब सुधरनी ही चाहिए
- डॉ. शरद सिंह
(दैनिक सागर दिनकर, 17.01.2018)


धारा 370 एक ऐसा ज्वलंत मुद्दा है जो कई दशकों से प्रतीक्षा कर रहा है सुलझाए जाने का। मोदी सरकार ने अडिग रहते हुए जिस प्रकार ट्रिपल तलाक और नोटबंदी जटिल मामलों को सुलझाया एवं लागू किया, उसी प्रकार की दृढ़ता की अपेक्षा रखता है धारा 370 का मामला। इस धारा के हटते ही कश्मीर का विधिवत् सम्मिलन हो सकेगा भारत के जनसामान्य से। इस मुद्दे पर मैं यहां चर्चा कर रही हूं कुछ ऐसे तथ्यों और बिन्दुओं की जिन्हें मैंने अपनी पुस्तकों ‘‘राष्ट्रवादी व्यक्तित्व श्यामाप्रसाद मुखर्जी’’ तथा ‘‘राष्ट्रवादी व्यक्तित्व सरदार वल्लभभाई पटेल’’ में सामने रखा है।

Charcha Plus Column of Dr Sharad Singh in Sagar Dinkar Dainik

जिस प्रकार नोटबंदी और ट्रिपल तलाक जैसे मामलों में केन्द्र सरकार ने तत्परता दिखाई और कड़ाई से कदम उठाए उसके बाद यह सोच बनना स्वाभाविक है कि उस ऐतिहासिक भूल को भी यह सरकार सुधारने की दिशा में कोई न कोई कठोर कदम उठाएगी जिसे ‘धारा 370’ के रूप में जाना जाता है। स्वयं भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर से इस तरह की मांगे समय-समय पर उठती रही हैं। विगत वर्ष यानी 2017 के दिसम्बर माह में शिवसेना के अरविंद सावंत ने कहा कि ‘‘तीन तलाक के खिलाफ विधेयक से समान नागरिक संहिता की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद पैदा होती है। अगर समान नागरिक संहिता लागू हो गई और कश्मीर से धारा 370 हट गई तो बहुत सारी चीजें ठीक हो जाएंगी।’’
इससे पूर्व दिसम्बर 2013 में राजनाथ सिंह ने कहा था -‘‘संसद में इस बात पर बहस हो कि क्या धारा 370 जम्मू कश्मीर के लिए किसी तरह से फायदेमंद है या वहां के लोगों को राजनीतिक रूप से सशक्त करने का काम करती है? अगर ऐसा नहीं है, तो इसे तुरंत निरस्त कर देना चाहिए।’’
सांसद अनुपम खेर ने धारा 370 के विषय में बोलते हुए अगसत 2017 में कहा था-‘‘ “देश के विभिन्न भागों से अगर हम कश्मीर में आधारभूत ढांचा बना सकते हैं, विभिन्न भागों से लोगों को भेज सकते हैं, देश के हर इंसान एवं हर नागरिक को वहां संपत्ति लेने का अधिकार हो सकता है, वहां पर शिक्षा के शैक्षणिक संस्थाएं बनाने का अधिकार हो सकता है, मिल्स बनाने का अधिकार हो सकता है, तो यह समस्या का एक अच्छा समाधान हो सकता है.“ इसी क्रम में हाल ही में यानी 12 जनवरी 2018 को आयोजित युवा दिवस के मौके पर जयपुर में संघ के वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश कुमार ने कहा कि ‘‘धारा 370 को हटाने से भारत की कीर्ति और यश बढे़गा। देश का भविष्य बदलेगा और नई दशा और दिशा की ओर बढ़ेगा। उन्होंने कहा कि यह धारा अस्थाई है और अब इसे हटाने का समय आ गया है।’’
अनुच्छेद 35ए, धारा 370 का ही हिस्सा है। इस धारा के कारण से कोई भी दूसरे राज्य का नागरिक जम्मू-कश्मीर में ना तो संपत्ति खरीद सकता है और ना ही वहां का स्थायी नागरिक बनकर रह सकता है। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर की कोई लड़की किसी बाहर के लड़के से शादी कर लेती है तो उसके सारे अधिकार खत्म हो जाते हैं। साथ ही उसके बच्चों के अधिकार भी खत्म हो जाते हैं।
वस्तुतः अनुच्छेद 370 के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान हैं कि - (1) यह जम्मू और कश्मीर को एक विशेष स्वायत्ता वाले राज्य का दर्जा देता है। (2) इसका खाका 1947 में शेख अब्दुल्ला ने तैयार किया था, जिन्हें प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और महाराजा हरि सिंह ने जम्मू-कश्मीर का प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। (3) इस धारा के अनुसार संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार है। लेकिन अन्य विषय से संबंधित कानून को लागू कराने के लिए केंद्र को राज्य का अनुमोदन चाहिए। (4) इसी विशेष दर्जे के कारण जम्मू-कश्मीर पर संविधान का अनुच्छेद 356 लागू नहीं होती है। राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्त करने का अधिकार नहीं है। (5) भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते हैं। यहां के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता होती है। एक नागरिकता जम्मू-कश्मीर की और दूसरी भारत की होती है। (6) यहां दूसरे राज्य के नागरिक सरकारी नौकरी नहीं कर सकते हैं। (7) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 360 जिसमें देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता है। (8) अनुच्छेद 370 की वजह से ही जम्मू-कश्मीर का अपना अलग झंडा और प्रतीक चिन्ह भी है।
‘‘जवाहरलाल नेहरू ने बार-बार यह घोषणा की है कि भारत में जम्मू और कश्मीर का विलय शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है, फिर भी यह अद्भुत बात है कि कोई भारतीय नागरिक भारत सरकार से अनुमति लिए बिना भारत के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता। यह अनुमति कम्युनिस्टों को भी मिली है जो राज्य में अपना वही विघटनकारी खेल खेल रहे हैं। किन्तु उन लोगों को जाने की अनुमति नहीं है जो भारतीय हैं और राष्ट्रीयता की दृष्टि से सोचते और करते हैं। .... मैं नहीं सोचता कि भारत सरकार को मुझे भारतीय यूनियन के किसी भी हिस्से में जिसमें स्वयं पं. नेहरू के अनुसार जम्मू और कश्मीर भी शामिल है, जाने से रोकने का कोई अधिकार है। वैसे अगर कोई कानून के प्रतिकूल आचरण करता है तो उसे इसके परिणाम अवश्य भुगतने होंगे।’’ 8 मई 1953 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कश्मीरयात्रा के लिए विदा देने आए जनसमूह सहित पत्रकारों से कहा था। उस दिन पं. श्यामा प्रसाद मुखर्जी दिल्ली से अम्बाला जाने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचे। दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उन्हें विदाई देने के लिए भारतीय जनसंघ, हिन्दू महासभा, आर्य समाज तथा अन्य संगठनों के हजारों कार्यकर्ता उपस्थित थे। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ अटल बिहारी वाजपेयी, वैद्य गुरूदत्त, प्रो. बलराज मधोक, डॉ. बर्मन तथा टेकचंद शर्मा भी उनके साथ रवाना होने के लिए आ पहुंचे। इस अवसर पर अनेक प्रमुख समाचार पत्रें के प्रतिनिधि वहां उपस्थित थे। उन्होंने यह भी कहा था कि -‘‘ शेख अब्दुल्ला ने पं. नेहरू पर दबाव बना कर राज्य में अलग प्रधान, अलग विधा और अलग निशान का प्रावधान करा लिया है।’’
डॉ. मुखर्जी जम्मू कश्मीर को भारत का पूर्ण अभिन्न अंग बनाना चाहते थे। उस समय जम्मू कश्मीर का अलग झण्डा और अलग संविधान था। वहां का मुख्यमन्त्री (वजीर-ए-आजम) अर्थात् प्रधानमन्त्री कहलाता था। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने देश की अखण्डता को अक्षुण्ण बनाए रखने का संकल्प लेते हुए घोषणा की - ‘‘स्वतंत्र भारत में सदा एक देश, एक निशान, एक प्रधान ही होगा और हमें अलगाववादी तत्वों को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए कटिबद्ध रहना होगा।’’
श्यामा प्रसाद मुखर्जी इस संवैधानिक प्रावधान के पूरी तरह खि़लाफ़ थे। उन्होंने कहा था कि इससे भारत छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट रहा है। यही नहीं, मुखर्जी का ये भी मानना था कि यह धारा शेख अब्दुल्ला के ’तीन राष्ट्रों के सिद्धांत’ को लागू करने की एक योजना है। मुखर्जी 1953 में भारत प्रशासित कश्मीर के दौरे पर गए थे. वहां तब ये क़ानून लागू था कि भारतीय नागरिक जम्मू कश्मीर में नहीं बस सकते और वहां उन्हें अपने साथ पहचान पत्र रखना ज़रूरी था। श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कानपुर सम्मेलन के अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि -‘‘भारतीय स्वतंत्रता को यदि सारपूर्ण बनाना है तो इसे भारतीय संस्कृति के आधारभूत तत्वों और मूल्यों को ठीक-ठीक समझने और उनके प्रचार-प्रसार में सहायक बनना पड़ेगा। कोई भी राष्ट्र जो अपनी अतीत की उपलब्धियों से गर्वान्वित नहीं होता अथवा प्रेरणा नहीं लेता, वह न तो कभी अपने वर्तमान का निर्माण कर सकता है और न ही कभी भविष्य की रूपरेखा बना सकता है। कोई दुर्बल राष्ट्र कभी महानता की ओर नहीं बढ़ सकता।’’
इससे पूर्व पं. नेहरू को लिखे गए अपने चतुर्थ पत्र में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने उन्होंने जम्मू-कश्मीर की समस्या को सुलझाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे जिनमें से कुछ प्रमुख सुझाव थे- ‘‘जम्मू और कश्मीर का संविधान अंतिम रूप से भारतीय संविधान का अंग होगा, जम्मू और लद्दाख को बिना सीमा परिवर्तन के प्रांतीय स्वशासन दिया जाए तथा भारतीय राष्ट्रध्वज को सर्वाधिक प्रतिष्ठा प्राप्त हो।’’ इन सुझावों पर अमल करने के विपरीत पं. जवाहरलाल नेहरू ने गोलमाल रवैया अपनाया। पंडित नेहरू श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पत्रों का टालमटोल उत्तर देते रहे और उनसे मिल कर वार्तालाप करने के अवसर को टालते रहे। कई दिन बाद पं. नेहरू ने उत्तर दिया कि ‘‘मैंने आपका पत्र मिलने के बहुत देर बाद पढ़ा था।’’
लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल सारे भारत को पटेल एक करने में सफल हुए किन्तु उनसे कश्मीर की रियासत का मामला जवाहरलाल नेहरू ने अपने लिये रख लिया था, जो आज तक ज्वलंत प्रश्न बना हुआ है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी आदि राष्ट्रवादी नेता चाहते थे कि जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के प्रश्न को हल करने का दायित्व सरदार वल्लभ भाई पटेल को सौंपा जाना चाहिए किन्तु जवाहरलाल नेहरू इस पक्ष में नहीं थे। जवाहरलाल नेहरू ने जम्मू-कश्मीर का मामला अपने हाथ में ही रखा। यदि जवाहरलाल नेहरू ने कश्मीर की रियासत को भी वल्लभ भाई के हवाले दिया होता तो कश्मीर की समस्या 21 वीं सदी का मुंह कभी नहीं देख पाती।
यही यही समय है कि एक बड़ी राजनीतिक भूल को सुधारते हुए कश्मीर में शांति स्थापना और वहां के विस्थापित एवं पीड़ित नागरिकों को एक खुशहाल ज़िन्दगी देने के लिए जरूरी है कि कश्मीर को धारा 370 से मुक्त कर के भारत के अन्य राज्यों की भांति आजादी से सांस लेने दिया जाए।
-----------------------------
#शरदसिंह #मेराकॉलम #चर्चाप्लस #दैनिक #सागर_दिनकर #सागरदिनकर #धारा370 #कश्मीर #लौहपुरुष #सरदार_वल्लभ_भाई_पटेल #श्यामा_प्रसाद_मुखर्जी #जवाहर_लाल_नेहरू #मोदीसरकार #राजनाथसिंह #अनुपमखेर #संघ_वरिष्ठ_प्रचारक #इंद्रेश_कुमार #Charcha_Plus #sagar_dinkar #SharadSingh #MyColumn #Ironman #Sardar_Vallabh_Bhai_Patel #Shyama_Prasad_Mukharji #Javaharalal_Neharu #Article370 #JammuKashmir #ModiGovernment #IndreshKumar

Sunday, January 14, 2018

Dr (Ms) Sharad Singh Honored by Rameshwar Guru Best Editor Award

Dr (Miss) Sharad Singh Awarded by Rameshwar Guru Journalism Award 2017 for Best Editing of 'Samayik Saraswati' Magazine New Delhi
मुझे नई दिल्ली से प्रकाशित होने वाली पत्रिका ‘सामयिक सरस्वती’ के उत्कृष्ट संपादन के लिए राज्यस्तरीय ‘रामेश्वर गुरू पुरस्कार 2017’ से माधवराव सप्रे समाचारपत्र संग्रहालय एवं शोध संस्थान, भोपाल की ओर से संग्रहालय के पं. झाबरमल्ल शर्मा सभागार में 12 जनवरी 2018 को आयोजित एक भव्य सम्मान समारोह में सम्मानित किया गया। मैं ‘सामयिक सरस्वती’ की कार्यकारी संपादक हूं । मुझे यह सम्मान मध्यप्रदेश विधान सभा के अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा, बरकतउल्ला विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति डॉ. प्रमोद वर्मा, राज्यसभा सदस्य आर. के. सिन्हा एवं सप्रे संग्रहालय के संस्थापक निदेशक पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने संयुक्तरूप से प्रदान किया।

हार्दिक आभार माधव राव सप्रे संग्रहालय भोपाल !!!
Dr (Miss) Sharad Singh Awarded by Rameshwar Guru Journalism Award 2017 for Best Editing of 'Samayik Saraswati' Magazine New Delhi

Dr (Miss) Sharad Singh Awarded by Rameshwar Guru Journalism Award 2017 for Best Editing of 'Samayik Saraswati' Magazine New Delhi

Dr (Miss) Sharad Singh Awarded by Rameshwar Guru Journalism Award 2017 for Best Editing of 'Samayik Saraswati' Magazine New Delhi

Dr (Miss) Sharad Singh Awarded by Rameshwar Guru Journalism Award 2017 for Best Editing of 'Samayik Saraswati' Magazine New Delhi

Dr (Miss) Sharad Singh Awarded by Rameshwar Guru Journalism Award 2017 for Best Editing of 'Samayik Saraswati' Magazine New Delhi

Dr (Miss) Sharad Singh Awarded by Rameshwar Guru Journalism Award 2017

Dainik Bhaskar, Sagar Edition, 14.01.2018 - Dr (Miss) Sharad Singh Awarded by Rameshwar Guru Journalism Award 2017 For Best Editing of ' Samayik Saraswati ' Magazine of New Delhi
 माधवराव सप्रे स्मृति समाचार संग्रहालय एवं शोध संस्थान भोपाल द्वारा उत्कृष्ट पत्रिका सम्पादन के लिए दिया जाने वाला वर्ष 2017 का ‘ रामेश्वर गुरू पत्रकारिता पुरस्कार ’ आपकी इस मित्र यानी मुझे नई दिल्ली से प्रकाशित होने वाली पत्रिका 'सामयिक सरस्वती' के श्रेष्ठ संपादन के लिए प्रदान किया किया गया। मेरे शहर के समाचारपत्रों ने इस समाचार को प्रमुखता से स्थान देते हुए जो अपनत्व प्रकट किया है उसके लिए मैं उनकी हृदय से आभारी हूं।

Navdunia, Sagar Edition, 14.01.2018 - Dr (Miss) Sharad Singh Awarded by Rameshwar Guru Journalism Award 2017 For Best Editing of ' Samayik Saraswati ' Magazine of New Delhi
Aacharan, Sagar Edition, 14.01.2018 - Dr (Miss) Sharad Singh Awarded by Rameshwar Guru Journalism Award 2017 For Best Editing of ' Samayik Saraswati ' Magazine of New Delhi

Sagar Dinkar, Sagar Edition, 14.01.2018 - Dr (Miss) Sharad Singh Awarded by Rameshwar Guru Journalism Award 2017 For Best Editing of ' Samayik Saraswati ' Magazine of New Delhi
Deshbandhu, Sagar Edition, 14.01.2018 - Dr (Miss) Sharad Singh Awarded by Rameshwar Guru Journalism Award 2017 For Best Editing of ' Samayik Saraswati ' Magazine of New Delhi

Patrika, Sagar Edition, 14.01.2018 - Dr (Miss) Sharad Singh Awarded by Rameshwar Guru Journalism Award 2017 For Best Editing of ' Samayik Saraswati ' Magazine of New Delhi


Hearty Thanks Dainik Bhaskar, Navdunia, Patrika, Deshbandhu, Aacharan and Sagar Dinkar !!!

Wednesday, January 10, 2018

हादसों के बीच स्कूली बच्चे और हमारी चेतनाहीनता - डॉ. शरद सिंह ... मेरा कॉलम : चर्चा प्लस

Dr (Miss) Sharad Singh
मेरा कॉलम : चर्चा प्लस
हादसों के बीच स्कूली बच्चे और हमारी चेतनाहीनता
- डॉ. शरद सिंह


(दैनिक सागर दिनकर, 10.01.2018)

    इन्दौर स्कूल बस हादसा एक ऐसा सबक है जिससे हमारी आंखें खुल जानी चाहिए। साथ ही प्रश्न उठता है कि नौनिहालों की ज़िन्दगी से खिलवाड़ करने वाले कौन हैं? इस प्रश्न के उत्तर में पहली उंगली उठती है लापरवाह बस मालिकों की ओर जो स्कूल बसों के लिए निर्धारित सुरक्षा नियमों का ठीक से पालन नहीं करते हैं। दूसरी उंगली उठती है, उन ड्राईवर्स की ओर जो गाड़ी की फिटनेस की बिना बारीकी से जांच किए, बसों में बच्चों को भर कर चल पड़ते हैं। तीसरी उंगली उठती है, उन माता-पिता एवं अभिभावकों की ओर जो स्कूल बसों पर बच्चों को चढ़ाने से पहले बस की फिटनेस के प्रति कोई जागरूकता नहीं दिखाते हैं। क्या हम इतने चेतनाहीन होते जा रहे हैं कि बच्चों का जीवन बचाने के लिए एक अभिभावक या एक नागरिक के रूप में सजग नहीं हो सकते हैं?
Charcha Plus Column of Dr Sharad Singh in Sagar Dinkar Dainik

एक उत्साही एवं जागरूक फेसबुक मित्र हेमेन्द्र सिंह चंदेल बगौता ने अपनी एक पोस्ट में मध्यप्रदेश के छतरपुर नगर में चल रही कुछ ऐसी स्कूल बसों के बारे में जानकारी शेयर की जो शासन द्वारा निर्धारित किए गए सुरक्षा नियमों का पालन नहीं कर रही हैं। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि ‘‘इंदौर स्कूल बस हादसा से न तो छतरपुर के बच्चों के माता पिता ने न ही स्कूल संचालकों ने कोई सबक नही लिया है और न ही आरटीओ विभाग ने कोई चेकिंग करने की जहमत उठाई है।’’ उन्होंने प्रमाण के तौर पर कुछ कागज़ात भी फेसबुक पर शेयर किए। यूं तो छतरपुर के हेमेन्द्र सिंह चंदेल (जैसा कि उनकी प्रोफाईल में लिखा है) म.प्र. कांग्रेस आई.टी. एवं सोशल मीडिया सेल के प्रदेश सचिव हैं लेकिन यहां मुद्दा राजनीतिक नहीं अपितु उन मासूम बच्चों की ज़िन्दगी है जो हमारा भविष्य हैं। वैसे भी ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीतिक खींचतान के बजाए मानवीय आधार को प्रमुखता मिलनी चाहिए। अच्छा लगा उनकी फेसबुक-पोस्ट को देख कर कि कोई व्यक्ति सुरक्षा-कमियों के प्रति प्रमाण सहित आवाज़ उठा रहा है। यदि कोई स्कूल बस मालिक सुरक्षा नियमों की अनदेखी कर रहा है तो हर व्यक्ति का दायित्व है कि वह ‘व्हिसिल-ब्लोअर’ बन कर ऐसी जानकारी को सामने लाए ताकि कोई बड़ा हादसा होने से पहले स्थिति को सुधारा जा सके। यह देश के हर शहर के नागरिकों एवं प्रत्येक उस माता-पिता का दायित्व है जो अपने बच्चों को स्कूल बसों में भेजते हैं।
इन्दौर स्कूल बस हादसा एक ऐसा सबक है जिससे हमारी आंखें खुल जानी चाहिए। इंदौर के कनाडिया रोड के पास एक सड़क दुर्घटना में 5 बच्चों समेत बस ड्राइवर की मौत हो गई। इस हादसे में डीपीएस (दिल्ली पब्लिक स्कूल) की स्कूली बस के ड्राइवर की लापरवाही का मामला सामने आया। हुआ यूं कि तेजाजी नगर की ओर जा रही एक तेज रफ्तार दिल्ली पब्लिक स्कूल बस कनाडिया क्षेत्र के पास सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई। इस घटना में स्कूली बस में सवार 5 बच्चों और ड्राइवर की मौत हो गई है। कनाडिया थाना प्रभारी के अनुसार, ’‘स्कूली बस गलत साइड से जा रही थी। शायद बस के ब्रेक फेल हो गए या फिर डिवाइडर से टकराने की वजह से ट्रक से सीधी भिड़ंत हो गई।’’ हादसे में स्कूल बस का अगला भाग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। स्कूल की छुट्टी के बाद यह बस विद्यार्थियों को उनके घर छोड़ने जा रही थी। कनाडिया थाना प्रभारी ने बताया कि बस तेजाजी नगर की तरफ जा रही थी, जो कि वन-वे है। मतलब साफ है कि स्कूली बस गलत दिशा में जा रही थी। पूरी घटना पर टिप्पणी करते हुए एएसपी इंदौर ने भी कहा, बस ने अपना संतुलन खो दिया और दूसरी लेन में सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई। प्रश्न यह उठता है कि गलती कहां और किससे हुई है?
चिंताजनक बात यह भी है कि विगत दो माह में अर्थात् नवम्बर, दिसम्बर 2017 में भी स्कूल बसों के भीषण हादसां ने दिल दहलाया है। विगत 30 नवम्बर, 2017 को उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जनपद के सेक्टर 39 थाना क्षेत्र में गोल्फ कोर्स मेट्रो स्टेशन के पास स्कूली बच्चों से भरी बस पलट गई। सुबह लगभग 7ः30 बजे नौ स्कूली बच्चों और दो अध्यापिकाओं को लेकर जा रही विश्व भारती पब्लिक स्कूल की बस गोल्फ कोर्स मेट्रो स्टेशन के पास शशि चौक पर ऑटो को बचाने की कोशिश में अनियंत्रित होकर पलट गई। बस पलटने से उसमें सवार बच्चे और शिक्षिकाएं फंस गईं। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर मौके पर पहुंचे लोगों ने बस का शीशा तोड़कर बच्चों को सकुशल निकाला। गनीमत यह है कि इस हादसे में बस चालक और कुछ बच्चे मामूली रूप से घायल हुए। मौके पर पहुंची पुलिस ने लोगों की मदद से बच्चों और अध्यापिकाओं को सकुशल बाहर निकाला। बस एक प्राइवेट ट्रैवलर की थी। वह स्कूल की बस नहीं थी। बस मालिक ने सुरक्षा के पूरे मानक पूरे नहीं किए थे।
वहीं इससे पहले 03 नवम्बर 2017 को हिमाचल प्रदेश के मंडी से बच्चों को लेकर आगरा आ रही बस एक्सप्रेस-वे पर पलट कर खाई में जा गिरी। इस हादसे में बस ड्राइवर की मौत हो गई जबकि, टीचर व बच्चे मिलाकर 35 लोग घायल हो गए। हादसे में गंभीर रूप से घायल एक छात्र का हाथ काटना पड़ा। हादसा बस का अचानक टायर फटने की वजह से हुआ। बताया जाता है कि बागपत नंबर की टूरिस्ट बस हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित आलोक भारती पब्लिक स्कूल के करीब 125 बच्चों को स्टडी टूर पर लेकर निकली थी। गुरुवार को छात्रों ने मथुरा, वृंदावन का भ्रमण किया। शुक्रवार की सुबह बच्चों को आगरा घुमाने के लिये मथुरा से एक्सप्रेस-वे के रास्ते से निकली थी। इसी दौरान जब बस एत्मादपुर के गढ़ी रस्मी गांव के करीब झरना नाले पर पहुंची तभी बस का अगला टायर अचानक तेज आवाज के साथ फट गया। बस की रफ्तार तेज होने की वजह से ड्राइवर बस पर नियंत्रण नहीं कर पाया और बस रोड साइड रेलिंग तोड़ते हुए खाई में जा गिरी।
यूं भी, भारत में हर वर्ष सड़क दुर्घटना में मृत्यु का आंकड़ा बढ़ रहा है। सन् 2015 में 400 लोगों के प्रतिदिन मौतों की तुलना में पिछले साल 2016 में भारत में सड़क दुर्घटनाओं में कम से कम 410 लोगों की प्रतिदिन मौत का आंकड़ा दर्ज किया गया। टाइम्स ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार डेढ़ लाख लोग 2016 में सड़क दुर्घटना में मारे गए जबकि तुलनात्मक रुप से 2015 में ये आंकड़ा एक लाख छियालिस हज़ार था। साल 2016 में उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित छह राज्यों में हुए मौतों के आंकड़े को देखा जाए तो इसमें चिंताजनक वृद्धि हुई है। इन आकड़ों ने 1970 के बाद के सारे रिकार्ड तोड़ दिए हैं।
देश में होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के दुखद सच के बीच उन बच्चों की ज़िन्दगी दांव पर लगी रहती है जो लापरवाह बस मालिकों की बसों में अपना भविष्य बनाने घर से निकलते हैं और अपने जीवन से हाथ धो बैठते हैं। स्कूली बच्चों की मृत्यु के ये आंकड़े बताते हैं हमारे देश में स्कूल जाने-आने के दौरान होने वाली सड़क दुर्घटना में बच्चों की मृत्यु दर में प्रति वर्ष बढ़ोत्तरी होती जा रही है। वर्ष 2000 से 2012 तक के आंकड़ों के अनुसार देश में मध्य प्रदेश ‘टॉप फाईव’ सबसे असुरक्षित राज्यों में शामिल है। नंबर एक पर महाराष्ट्र है, जहां वर्ष 2000 से 2012 में लगभग 52,073 स्कूली बच्चों की मौत हुई। वहीं 48,993 के आंकड़े के साथ मध्यप्रदेश दूसरे नंबर पर है। देश में प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ 70 लाख स्कूली बच्चे अनुमानतया 5 लाख बसों से स्कूल जाते हैं। इस दौरान कतिपय लापरवाह बस स्कूल मालिकों के कारण उनकी सलामती की कोई गारंटी नहीं रहती है। सन् 2002 से 2012 के बीच एक दशक के आंकड़ों से भी साफ़ पता चलता है कि भारत में सड़क दुघर्टना में होने वाली स्कूली बच्चों की मौतों में बढ़ोत्तरी होती जा रही है।
प्रश्न फिर वही कि नौनिहालों की ज़िन्दगी से खिलवाड़ करने वाले कौन हैं? इस प्रश्न के उत्तर में पहली उंगली उठती है लापरवाह बस मालिकों की ओर जो स्कूल बसों के लिए निर्धारित सुरक्षा नियमों का ठीक से पालन नहीं करते हैं। दूसरी उंगली उठती है, उन ड्राईवर्स की ओर जो गाड़ी की फिटनेस की बिना बारीकी से जांच किए, बसों में बच्चों को भर कर चल पड़ते हैं। तीसरी उंगली उठती है, उन माता-पिता एवं अभिभावकों की ओर जो स्कूल बसों पर बच्चों को चढ़ाने से पहले बस की फिटनेस के प्रति कोई जागरूकती नहीं दिखाते हैं। क्या हम इतने चेतनाहीन होते जा रहे हैं कि बच्चों का जीवन बचाने के लिए एक अभिभावक या एक नागरिक के रूप में सजग नहीं हो सकते हैं? माता-पिता होने का मात्र इतना ही दायित्व नहीं होता है कि मोटी फीस और डोनेशन दे कर बच्चों को अच्छे स्कूल में दाखिला दिलाया और उस स्कूल या उससे संबंधित बस आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराने वालों के गुलाम हो गए। आंख मूंद कर बच्चों का बस पर चढ़ाया और उनकी सुरक्षा के प्रति हो गए निश्चिन्त। जिस तरह हम अपने बच्चों के खाने-पीने, ओढ़ने-पहनने के प्रति सर्त्तकता बरतते हैं, ठीक वैसे ही उन्हें स्कूल ले जाने वाली बसों की फिटनेस के प्रति भी सचेत रहना होगा। यदि बस सुरक्षा नियमों के अनुरूप नहीं है तो बस मालिक को टोकना होगा, यदि चालक लापरवाही से बस चलाता है तो उसे परिणामों के प्रति आगाह करना होगा। मासूम बच्चों के जीवन की सुरक्षा की खातिर जगाना होगा अपनी सोई हुई चेतना को और बनना ही होगा ‘व्हिसिल ब्लोअर’।
---------------------------

#शरदसिंह #मेराकॉलम #चर्चाप्लस #दैनिक #सागर_दिनकर #सागरदिनकर #सुरक्षा #इन्दौर_स्कूल_बस_हादसा #बच्चे #अभिभावक
#Charcha_Plus #sagar_dinkar #SharadSingh #Indore #SchoolBus #Accident #Parents

Tuesday, January 9, 2018

"औरत : तीन तस्वीरें " पुस्तक की समीक्षा...

"औरत : तीन तस्वीरें " पुस्तक की दैनिक ट्रिब्यून में प्रकाशित समीक्षा ...
Review of  Sharad Singh's book " Aurat Teen Tasviren" , Tribune, Chandigarh, 01.10.2017

Sharad Singh's book " Aurat Teen Tasviren"


Saturday, January 6, 2018

क्रूज पर सैर .... डॉ (सुश्री) शरद सिंह

Enjoy on the Cruise...⛴️

🌞जाड़े की सुबह कुनकुनी धूप में क्रूज 🛳️  की सवारी में ठंड का एहसास ही नहीं हुआ ....⚓⛴️🛳️
Dr (Miss) Sharad Singh, Author

Dr (Miss) Sharad Singh, Author

Dr (Miss) Sharad Singh, Author

Dr (Miss) Sharad Singh, Author

Dr (Miss) Sharad Singh, Author

Dr (Miss) Sharad Singh, Author

Dr (Miss) Sharad Singh, Author

Dr (Miss) Sharad Singh, Author

Dr (Miss) Sharad Singh, Author

Dr (Miss) Sharad Singh, Author

Dr (Miss) Sharad Singh, Author

Dr (Miss) Sharad Singh, Author

Dr (Miss) Sharad Singh, Author

Dr (Miss) Sharad Singh, Author

Dr (Miss) Sharad Singh, Author

Dr (Miss) Sharad Singh, Author


Dr (Miss) Sharad Singh, Author

Dr (Miss) Sharad Singh, Author

Dr (Miss) Sharad Singh, Author